Monday, 13 August 2018

सपनों को राह दिखाना

नफरतों की नाव,सवार आज बालपन
कश्ती छिन कागजों‌ की,है प्रफुल्ल मन
नेह स्नेह जम रहे,जलते वात्सल्य भाव
शुष्क हो चला चमन,काटें हैं बबूल के
बिन तारे रैन,अंबर के गीत सुनाना
गोद लिये सपनों को राह दिखाना।

सुनिल दूबे "कैमूरी"

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