Tuesday, 14 August 2018

"धरती का‌ हरित श्रृंगार"

  "धरती का‌ हरित श्रृंगार"

हरियाली दिखती नही
सूख रहे सब फूल।
क्यूं बेशर्मी से हंस रहे
आंखो पर डाले धूल।
           -करो धरती का हरित श्रृंगार
सब धुंआ धुंआ सा कर बैठे
पशु-पंछी ढूंढे आवास।
हरियाली यूं रुठ चली
ले जंगल से सन्यास।
            -करो धरती का हरित श्रृंगार
कभी हरे भरे इस गांव मे
होती थी पीपल की छांव।
जल रहा हर पांव पांव
अब पत्थर हो गये गांव।
             -करो धरती का हरित श्रृंगार
चहक महक सब छोड चले
संग हरियाली और गुल।
सजा रहे हम महलों को
लाकर कागज के फूल।
             -करो धरती का हरित श्रृंगार
न तुम अंधे न हम अंधे
फिर अंधा कौन इंसान
क्यूं ठंड रहे इस आंगन मे
जब घर बना रेगिस्तान।
             -करो धरती का हरित श्रृंगार

No comments:

Post a Comment

शेयर बाजार के मूलभूत नियम

1.कंपनी का कारोबार और संभावना कंपनी के शेयरों में निवेश से पहले यह देखना जरूरी है कि कंपनी का कारोबार क्या है और भविष्य में उसकी क्या संभावन...