देवाहार मे विष मिला है
पानी मे भी दहन भरा है
फिर भी भूख मिटाना है
ये मिलावट का जमाना है
गर्दभ संग तुरंग की बाजी
मूर्खों संग विज्ञ भी साझी
ठगों से प्यार निभाना है
ये मिलावट का जमाना है
तरकश छोडे़ तीर नुकीले
मुख से निकले भजन सुरीले
खुद से खुद को बहकाना है
ये मिलावट का जमाना है
नेता संग अभिनेता आगे
सबके घोडे़ रेस मे भागे
दावत पर पत्रकार बुलाना है
ये मिलावट का जमाना है
द्रौपदी स्वयं स्वयंवर रचती
कौरव-पांडव की मिटती हस्ती
अर्जुन का गांडीव चुराना है
ये मिलावट का जमाना है
एक आंख से ध्यान भटकाना
दूजे से बस आंख गडा़ना
लूट का माल पचाना है
ये मिलावट का जमाना है
कभी ठहाके,कभी विषादी
जूठन पे ऐंठन का आदी
परजीवी धर्म निभाना है
ये मिलावट का जमाना है
समुद्र-मंथन से अमृत की लूट
हलाहल के संग इसकी घूंट
एक नया उत्पाद बनाना है
ये मिलावट का जमाना है
No comments:
Post a Comment